गर रूठो तो मानना भी सीखो
क्योंकि रूठे को मानाने  में
मज़ा तभी आता है
जब वो हमारी शक्ति के भीतर
मान जाता है,
क्योंकि
तज़ुर्बा कहता है
गर रूठने वाला ......
मानाने वाला की शमता को पार कर ले
तो एक खूबसूरत डाली उसके जीवन की टूट जाती है
वो स्वीकार कर ले............

Comments

Popular posts from this blog