अनजाने कभी कभी Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps March 01, 2017 अनजाने कभी कभी कुछ इस तरह टकराते हैं मुलाक़ातें कभी हुई नहीं शामें साथ गुज़री हों यूँ जसबात टकराते हैं Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
anubhav July 25, 2020 कभी कुछ समेटा नहीं इसलिए ही बिखरा नहीं अनुभव था किसी का समय पर उतार लिया खुद को सवार लिया जिसको जैसे देखनी है देख लो भाई सृष्टि सबकी लिए एक जैसी बनी है चाहे तो सवार लो या बिगाड़ लो भाई Read more
खाली हो गई May 12, 2021 शहर सूने हो गए दोपहर काली हो गई.. ये तेरे मेरे बच्चन की किताब जाने कैसे खाली हो गई। Read more
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