अनजाने कभी कभी

अनजाने कभी कभी
कुछ इस तरह टकराते हैं
मुलाक़ातें कभी हुई नहीं
शामें साथ गुज़री हों
यूँ जसबात टकराते हैं

Comments

Popular posts from this blog

anubhav