ज़माना सोचता है

ज़माना सोचता है
अब ठहर जाएगी ज़िंदगी हमारी
क्योंकि उन्होने हमारे दरवाज़े पर ताला लगा दिया
पर वो नादान
हमारी राहों से परेशान
क्या जाने
कदमों से तो हम दुनिया
के लिए चलते हैं,
कलम ने बहुत पहले ही हमें
दिल से चलना सिखा दिया ........

Comments