तुम्हारी शिकायतों की चिट्ठी पढ़ कर
तुम्हारी शिकायतों की चिट्ठी पढ़ कर
ऐसा लगता है
कुछ पल और ऐसे ही जी लें
क्योंकि खुद को इसके हिसाब से चलाने के बाद
भले ही तुम हमे चाहने लागो
पर हम खुद को चाह नही पाएँगे
ऐसा लगता है
कुछ पल और ऐसे ही जी लें
क्योंकि खुद को इसके हिसाब से चलाने के बाद
भले ही तुम हमे चाहने लागो
पर हम खुद को चाह नही पाएँगे
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