उनकी खुशी थी हमारी ज़िंदगी

उनकी खुशी थी
हमारी ज़िंदगी
जो पसंद था उन्हें
हम करते थे वही
बहुत खुश थे
क्या बताएँ,
हर ओर लगता था
हवाएँ हमें ही देख देख मुस्कुराएँ
एक दिन उनकी ज़िंदगी की किताब
लगी हमारे हाथ,
सोचा चोरी से पढ़ कर
एक बार फिर उनके नाम का सिंदूर माँग में भर कर,
उन्हें झूम के दिखाएँगे
उनके मन की बात
हम खुद उन्हें पढ़ कर बतलाएँगे
चंचल मन के संग
समा भी बेफ़िक्र था
अचानक थमा सब
क्योंकि

खुद को हम उस किताब में खोज रहे थे
जिसमें हमारे नाम का ज़िक्र भी ना था............

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