जीवन को जन्म देने वाली माँ को
लोग हमें कमज़ोर समझते हैं
जीवन को जन्म देने वाली माँ को
लोग कमज़ोर समझते है
छाती से लगा कर दूध पिलाने वाली माँ को
लोग कमज़ोर समझते हैं,
जिस माँ के आशीर्वाद में परिस्थिति को
बदलने की ताक़त है
लोग उस कमज़ोर समझते हैं,
जो किसी के नाम का माँग में सिंदूर भर, पल में अपना सब कुछ उस पर न्योछावर कर देती है
लोग उसे कमज़ोर समझते हैं,
देवियों के रूप में पूजे जानी वाली नारी को
लोग कमज़ोर साझते हैं
शर्म आती है ये सोच कर
नारी के कोक से जन्म लेने वाले लोग ही
नारी का करते नही सम्मान
और खुद को बताते हैं इंसान...........
जीवन को जन्म देने वाली माँ को
लोग कमज़ोर समझते है
छाती से लगा कर दूध पिलाने वाली माँ को
लोग कमज़ोर समझते हैं,
जिस माँ के आशीर्वाद में परिस्थिति को
बदलने की ताक़त है
लोग उस कमज़ोर समझते हैं,
जो किसी के नाम का माँग में सिंदूर भर, पल में अपना सब कुछ उस पर न्योछावर कर देती है
लोग उसे कमज़ोर समझते हैं,
देवियों के रूप में पूजे जानी वाली नारी को
लोग कमज़ोर साझते हैं
शर्म आती है ये सोच कर
नारी के कोक से जन्म लेने वाले लोग ही
नारी का करते नही सम्मान
और खुद को बताते हैं इंसान...........
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