बहुत कुछ था कहने को
बहुत कुछ था कहने को
पर कह नहीं पाए
तेज़ रफ्ऱतार से भाग रहा था समुद्र
पर हम बह नहीं पाए
हिम्मत भी बहुत थी
पर दिखा नहीं पाए
सोचते ही रह गए
कुछ कर नहीं पाए
सब कुछ होते हुए भ
ना जाने क्यों
ये काले घने बादल के साए
देखते ही रह गए
पर हटा नहीं पाए।
पर कह नहीं पाए
तेज़ रफ्ऱतार से भाग रहा था समुद्र
पर हम बह नहीं पाए
हिम्मत भी बहुत थी
पर दिखा नहीं पाए
सोचते ही रह गए
कुछ कर नहीं पाए
सब कुछ होते हुए भ
ना जाने क्यों
ये काले घने बादल के साए
देखते ही रह गए
पर हटा नहीं पाए।
Comments
Post a Comment