तुम्हारी खूबीओं के आगे फिसल गए
तुम्हारी खूबीओं के आगे फिसल गए
खुदा के आगे बिचल गए,
ऐसा क्या सोचा जो गुणों से भर तुझे
तराशा इस कदर,
की जिधर भी कदम रखे तू
हो जाती खबर,
हो जैसे जन्म जन्मों का नाता
पर चाह कर भी
ना जाने क्यों
तुझे छूँ नही पता,
माना तुझेमें कोई बात है
पर...........चाँद मे भी दाग है,
वहाँ तो हम पहुँच गए
पर तेरे समीप एक अध्बुध सी आग है.......
खुदा के आगे बिचल गए,
ऐसा क्या सोचा जो गुणों से भर तुझे
तराशा इस कदर,
की जिधर भी कदम रखे तू
हो जाती खबर,
हो जैसे जन्म जन्मों का नाता
पर चाह कर भी
ना जाने क्यों
तुझे छूँ नही पता,
माना तुझेमें कोई बात है
पर...........चाँद मे भी दाग है,
वहाँ तो हम पहुँच गए
पर तेरे समीप एक अध्बुध सी आग है.......
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