इन आँखों में जो दर्द है
इन आँखों में जो दर्द है
उनका तू ही मर्ज़ है
ये तेरे लिए ही तड़प रही है
इन्हे पनाह दे,
पर गुज़ारिश है
इंतेज़ार की घड़ी को लंबा ना करना
गर ये सुख गईं
तो इन्हे फिर ज़िंदा ना करना,
वक़्त की लगाई मल्हम को
वक़्त के हाथ ही छोड़ देना,
जिन रास्तों पर , फिर ये आँखें
उम्मीद गड़ाए बैठीं हों
तुम उन रस्तो से रूख मोड़ लेना,
बेवफा ना समझूंगी ..तुम्हें
ये रहा वादा
समझ लूँगी की यहीं तक जुड़ा था
हमारे प्रेम का धागा..............
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