क्या खूब लिखता है मन


क्या खूब लिखता है मन,
जब हाथ मैं होती है कलम,
सामने तेरा चेहरा,
उठती मन मे हज़ारो तरंग,
लाज़मी है ..
तू इतनी खूबसूरत जो है
क्या क्या लिखू ..
समझ तू मेरे हर लम्हे की ज़रूरत है,
बे इंतेहाँ महोब्बत करता हूँ तुझे सनम..
हर साँस मे बसी मेरे तेरी ही सूरत है..

धन्यवाद
सोनाली सिंघल




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