नज़ाने केसा समय आने वाला है
धूप मैं भी अब सब दिखता काला है,
अनकही सी बन गई हर एक सोच
शायद वक़्त अपनी मार अब मुझ पर बरसाने वाला है,
लम्हे हाथो से फिसलने लगे हैं
कोई है जो मुझे अब तड़पाने वाला है……
तुम्हारी खामोशी भारी मुस्कुराहट बहुत कुछ कह जाती है..... लफ़्ज़ों का क्यों बेवजह इस्तेमाल करती हो हमारे जवाब में बस मुस्कुरा दिया करो वही काफ़ी है............
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