आँसुओं के बेह्ते
तक्दीर खुद ब खुद तस्वीर बन गई,
बहोत कोशिश की फिर बदलने की
पर वो तस्वीर शीशे मे जड़ गई,
क्या खूब कहा है किसी ने………
औरत का अपना कोई वजूद नही
जब वो माँगे तभ नाजायज़ मे
जब उसे मिले स्वीकार करे तभी………
खुद पर ना कर इतना गुमान कि खुदा की रहमतो को भाँप ना सके, मौत सबको मिटी मे हे मिलती है क्या सोचता है तू खुले आकाश के तले, यदि फर्क सिर्फ़ अमीरी ग़रीबी का है तो ये बस पैसे का कमाल है, खुदा ने तो हम सबको एक जैसा हे बनाया है उपर मिलकर पूछूँगा तुझसे बोल……. अब तेरा क्या ख़याल है………. धन्यवाद सोनाली सिंघल
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