ज़िंदगी की गाड़ी कहीं रुक गई थी शायद मैं अबकी बार परिस्थितियों के आगे झुक गई थी............ वही नीला आकाश आज फीका सा नज़र आ रहा था क्योकि देखना जिसे चाह रही थी वो दिख नही पा रहा था....
ज़िंदगी में सब कुछ ख़ास था जब तू पास था, मुमकिन था सब मैं क्या कहूँ अब, तू एक ऐसा आसमाँ था जो मेरे पल- पल से जुड़ा था, तू मेरे मन की सुन लेता था मैं जब जब गुनगुनाती थी, कैसे बताओं तेरे साथ पर मैं कितना इतराती थी........