Posts

अब लगता है मझधार में ही ठीक था कम्सेकम उलझे सवालों को सुलझाने में व्यस्त तो था......... खाली बैठा ..... तो वक़्त को भी बर्दाश नही….

अब लगता है मझधार में ही ठीक था कम्सेकम उलझे सवालों को सुलझाने में व्यस्त तो था......... खाली बैठा ..... तो वक़्त को भी बर्दाश नही ….

खुद की तलाश में खुद को तराशना चाहता हूँ भीतर छुपे सत्य के साथ मैं खुद को लेकर भटकना चाहता हूँ.................. क्योंकि ढूँढ है उसकी नाव पर बैठा हूँ मैं जिसकी , वो कहता है तेरे भीतर हूँ तो मुझे छवि दिखती है किसकी...............

खुद की तलाश में खुद को तराशना चाहता हूँ भीतर छुपे सत्य के साथ मैं खुद को लेकर भटकना चाहता हूँ.................. क्योंकि ढूँढ है उसकी नाव पर बैठा हूँ  मैं जिसकी , वो कहता है तेरे भीतर हूँ तो मुझे छवि दिखती है किसकी...............

अब वक़्त से क्या शिकायत करूँ आख़िर में ...............मल्हम तो वो ही लगाता है.........

अब वक़्त से क्या शिकायत करूँ आख़िर में ...............मल्हम तो वो ही लगाता है.........

हम तज़ुर्बे से निखरते हैं उम्र से नही हम अपनो से बिछड़ते हैं कर्म से नही........

हम तज़ुर्बे से निखरते हैं  उम्र से नही हम अपनो से बिछड़ते हैं  कर्म से नही........

मंज़िल भले ही नज़र ना आए तू हिम्मत कम ना करना, भले मजधार में फँस जाएँ कदम तू स्वॅम से जंग ना करना , यदि एश्वर भी परीक्षा लेने आए तू विश्वास को अपने भंग ना करना बस अटल अडिग चलते चले जाना मुसाफिर मंज़िल पर पहुँच कर ही नया जन्म है लेना ..........

मंज़िल भले ही नज़र ना आए तू हिम्मत कम ना करना, भले मजधार में फँस जाएँ कदम तू स्वॅम से जंग ना करना , यदि एश्वर भी परीक्षा लेने आए तू विश्वास को अपने भंग ना करना बस अटल अडिग चलते चले जाना मुसाफिर मंज़िल पर पहुँच कर ही नया जन्म है लेना ..........

खुद को बेहतरीन बनाने की चाह में बध से भत्तर हो गया, मैं जैसा था वैसा भी ना रहा ज़माने के हिसाब से चल नही पाया और खुद को इस कश्मक्श में कहीं भूल आया.......

खुद को बेहतरीन बनाने की चाह में बध से भत्तर हो गया, मैं जैसा था वैसा भी ना रहा ज़माने के हिसाब से चल नही पाया और खुद को इस कश्मक्श में कहीं भूल आया.......

हारे वहीं है जो लड़े हैं जीते वहीं हैं जो हर हाल में खडें हैं............

Image