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दोस्त कहते हैं खुद को पर खुदा से लगते हैं मुझको

कामीने है साले जब भी खाली होते हैं तभी मिलने आते हैं, पर सच तो ये है ....... जब आकर गले लगाते हैं अजब सा हक़ जता गम से भरा दिल पिघला जाते हैं दोस्त कहते हैं खुद को पर खुदा से लगते हैं मुझको 

दुआओं की कमी सी लग रही है देना यारों ज़िंदगी साँसों के बीच अटक रही है ............

दुआओं की कमी सी लग रही है देना यारों ज़िंदगी साँसों के बीच अटक रही है ............

प्रकृति की रूह उदास है हर साँस मे प्रदूषण का वास है........

प्रकृति की रूह उदास है हर साँस मे प्रदूषण का वास है........

साँसे बेख़बर है....

दुआओं में किसी अपने की घेहरा असर है जान नही मुझमें मगर.....साँसे बेख़बर है.... हर पल टूट रहा हूँ जाने कैसे सब्र है, दिल कुछ खुवाहिशे बाकी हैं शायद जुड़ा उन्हीं से ये सफ़र है, होना है जो वो होगा ही बस मन सब कह पा रहा है इसलिए ज़िंदगी ज़फ़र है................

हर साल उस रावन को क्या मारते हो जो मर कर आज भी ज़िंदा है

हर साल उस रावन को क्या मारते हो जो मर कर आज भी ज़िंदा है जिसने माँ सीता का हरण भले ही किया परंतु उनकी इच्छा की विरुध उन्हें कभी हाथ नही लगाया परिणाम! पाप का अंत तो हम आज भी बार- बार उस ही रावन को क्यों मारे यदि मारना ही है , तो आज के उस रावन को मारो जो सीता हरण तो करता ही है और उसे दरिंदे की तरह नोच नोच कर मार  डालता है या अधमरी हालत में ज़िंदा मरने के लिए छोड़ खुद वो जानवर दूसरे शिकार की तलाश में आज़ाद घूमता है......... विजयदशमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ

हर साँस मे मन के शब्दों को उतार मैं खुद को पूर्ण पाता हूँ वरना कुछ भी करलूँ दुनिया की भीड़ में खुद को अधूरा ही पाता हूँ ....

हर साँस मे मन के शब्दों को उतार मैं खुद को पूर्ण पाता हूँ वरना कुछ भी करलूँ दुनिया की भीड़ में खुद को अधूरा ही पाता हूँ ....

सवाल तुम्हारी तकलीफ़ का क्या है नाम? जवाब बस बिना जाने लगालेना दूसरों की बातों का अनुमान

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